" मुस्कराहट "


1"यूं लगता था की सब कुछ लुटा देंतेरी इक मुस्कराहट पे

लुट कर ही तो हमने जानाकी क्यों तुम्हे मुस्कुराने की आदत है "
२। "हवा के इक झोंके से जब, बादल का कोई टुकडा हटता है
तब तेरे सुर्ख होठों से , मुस्कुराहट का शहद टपकता है
बरसती है तेरे चहरे से, बेहिसाब मासूमियत
सहर की रौशनी से जब ,कुहरा कोई छंटता है
शाम-ओ -सहर तो बहाने हैं , बस तेरी पलकों के झुकने उठने के
मासूम सितम पे तो तेरे , आसमां भी झुकता है
बहुत गिरा मै, जिन्दगी की राहों में
वो तो बस, मेरे सुकून का ही रास्ता है
बस अब तो यही कहता हूँ की,
ख्यालों में मेरे भी ,चाँद कोई इक बसता है "

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