"ख्वाब और हकीकत (virtual vs real)"

हकीकत और ख़्वाबों का बहुत पुराना रिश्ता है , और दोनों के बीच का फ़र्क़ भी । आज मै बड़ी ईमानदारी से खुद के साथ क़िस्मत के मज़ाक़ को बता सकता हूँ। मै ख्वाब देखा करता था की मै धनवान, सुंदर, सजीला और सुखी इंसान बनूँगा। बस मुझे इंतज़ार अपने बड़े होने का था। मगर हकीकत मै ना मै धनवान बन पाया , ना ज्ञानवान और ना ही सुखी । ज्ञान मिला भी तो बहुत कुछ ऐसा जिसका जिन्दगी में बहुत कम इस्तेमाल हो। रही सुंदर और सजीले होने की तो वो भी कुछ ऐसी नही की धन और सुख मिले। ख्वाब में परियां हम पर गुलाब जल की तरह जान छिड़कती थी मगर हकीकत में कोई साइड डांसर या जूनियर आर्टिस्ट भी नही मिली। मुझे शौक था बेशकीमती कारों का और खूबसूरत गाड़ियों का , मेरे कमरे की दीवार ऐसी गाड़ियों की तस्वीरों से भरी हुई थी , मगर पिछले कई सालो से मै , अपनी दो पहिया ही चला रहा हूँ । कभी कभी टैक्सी में सफर कर लेता हूँ। जिन्दगी ने मेरे सपने पूरे ज़रूर किए मगर उस शिद्दत से नहीं, जैसे मै चाहता था। इसलिए ख्वाब और हकीकत का फासला अभी भी कायम है। मैंने बचपन में सपना देखा था फाइटरपायलट बनने का ,या सच कहूँ तो उस समय cocacola का एक aid आता था, उसमें अ...