बहुत ही जल्द हमारे देश का स्वतंत्रता दिवस आने वाला है , जगह जगह तिरंगा फहराया जायेगा , स्कूलों में मिठाई बांटी जाएगी , ऍफ़ .एम् . और चैनलों पे देशभक्ति के गीत गाए जायेंगे , लगेगा की सचमुच हम बहुत देशभक्त देश में रहते है | लगता है की सारा देश त्याग, शांति और खुशहाली के तीन रंगों में रंग चुका है | मगर अगले दिन सब खत्म , रिश्वतखोर अपने धंधो पे फिर चले जायेंगे , भ्रष्ट सरकार और नेता अपनी काली करतूतों को फिर और जोर शोर से अंजाम देने लगेंगे , चोरी ठगी और कालाबाजारी फिर शुरू हो जाएगी | गन्दी राजनीती के चलते शहर के गुंडों से लेकर , जंगलों के आदिवासी सभी को इस्तेमाल किया जाने लगेगा | अंकल की गुलामी के चलते nuclear deal से लेकर सारी छुपी और खुली नीतियाँ बनने लगेंगी | क्या कभी हम आजाद हुए थे ? नहीं हमारी मानसिकता हमेशा से गुलाम थी और है | कभी हम अंग्रेजों के गुलाम थे , कभी मुगलों के तो कभी ducth , और फ्रांसीसियों के , कभी अपने चुने हुए नेताओं के | और तो और आज भी हम कहीं कहीं आर्थिक रूप से विकसित देशों के गुलाम है | क्या बात है की ये कमबख्त गुलामी छूटती नहीं , बड़े से बड़ा आदमी हो, कही ना कही...