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Thursday, November 10, 2011

उलझी सी कश-म-कश

उलझी सी कश-म-कश

ज़िन्दगी एक खूबसूरत उलझी सी कश-म-कश
बहती जैसे एक पहाडी नदी अल्हड मद-मस्त
कभी जूझती कभी गाती
कभी पथरीली चट्टानों से चोटिल भी हो जाती
मगर बहती जाती हर पल
ना रुकना , ना थकना और ना थमना
बस आगे ही बढ़ते रहना
जैसे चलने का फलसफा हो सीधा सा एक बस
कभी मकडी के एक जाले पे
जमी ओस की बूंदों की लडियां
कभी किसी जंगली कचनार की
फूटती कलियाँ
कभी सुर्ख रंग जंग का
तो कभी बहते आंसू बेबस
कभी क्रोध, क्षोभ ,बदले और मोह की अनगिनत लपटों में जलती
कभी दूर ऊंचे मंदिर के दीपक में टिमटिमाती
कभी मस्जिद क़ी अजान में गुनगुनाती
कभी मिलती ऐसे, हो मानो अज्ञान का गहरा तमस
और कभी प्रेयसी के अधरों का सौम्य स्पर्श
ज़िन्दगी एक उलझी सी कश-म-कश
बहती जैसे एक पहाडी नदी अल्हड मद-मस्त

Saturday, November 5, 2011

हमारा शहर

पिछले कुछ दिनों से हम छत्तीसगढ़ का राज्य दिवस मना रहे है , प्रगति पथ पर अग्रसर हमारा प्रदेश और जनजीवन देख कर मन प्रसन्न तो होना चाहता है मगर वो मुस्कान पूरी तरह कपोलो पे आ नहीं पाती . मुझे अब भी याद है आज से ११ वर्ष पहले जब १ नोव्म्बेर २००० को छत्तीसगढ़ राज्य बना था मै यही था अपनी सर्वप्रिय नगरी भिलाई में .भिलाई मेरा सपना था और मुझे अतिप्रिय. जब नया राज्य बना तो सभी ने कई तरह के सपने देखे . किसी ने चाह क़ी अब भिलाई में सॉफ्टवेर पार्क बनेगा , और नयी कंपनिया आयेगी , सारी सड़के ४ लेन क़ी हो जाएगी , रायपुर राजधानी बन्ने के कारण उसके पास होने का सबसे अधिक लाभ भिलाई को मिलेगा . वैसे भी भिलाई खुद ही दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखता आया है और अगर मै ये कहू क़ी अगर छत्तीसगढ़ नया राज्य ना भी बनता तो भी लोग भिलाई को ज़रूर जानते . इसकी वजह है यहाँ क़ी प्रगतिशील मानसिकता , भिलाई इस्पात सयंत्र , बहुत ही अच्छा शिक्षा का, खेलकूद का, सांस्कृतिक कलाओ का , हरा भरा वातावरण और इस छोटी सी जगह से यहाँ के लोगो का प्रेम और एक गर्मजोशी भरा व्यवहार . अगर कोई भिलाई वासी कही दूर जाता है तो उसमे बंगाल,बिहार,पंजाब ,हरियाणा,राजस्थान, दक्षिण भारत हर जगह क़ी झलक होती है . बाहरी व्यक्ति समझ ही नही पता क़ी आखिर ये आदमी है कहाँ का ?
और फिर जब वो भिलाई कहता है तब लोग ये जानने को उत्सुक हो जाते है क़ी ये जगह कैसी है ?
शायद यही कारण है क़ी आज क़ी तारीख में जर्मनी , अमेरका ,यूरोप और सारी दुनिया के लोग इस जगह के बारे में जानते है , कई वर्षो से भिलाई सर्वाधिक IIT चयनित उम्मीदवारों का , रेलवे, कर्मचारी चयन आयोग और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओ में शीर्ष स्तर पे रहा है | पिछले १४ वर्षो में मै खुद जहा भी रहा , मैंने रेलवे में ,corporate जगत में अरब ,अमेरिकन,फ़्रांसिसी,जेर्मन और ना जाने कितने देशो के लोगो से मिला , और जब भी अवसर मिला उन्हें ये बताया क़ी छत्तीसगढ़ और भिलाई क्या है | उस वर्णन में मेरी आँखों क़ी चमक देख कर वो ये जरूर कह उठते थे क़ी "once I want to see your native place Bhilai".और यही मेरा सबसे बड़ा उपहार होता था |
मेरा यहाँ वापस आना मेरी तकदीर से मेरी लम्बी लड़ाई का अंत था , जिसमे मै विजयी रहा था | ये भावना मुझे शायद मेरी सबसे बड़ी जीत लगती है | यहाँ की धूप, ठण्ड, हरियाली , स्कूल जाते बच्चे और काम पे जाते लोग और बारिश में भीगी सड़के देखता हूँ तो मन प्रसन्न हो उठता है | मन कहता है बस अब हमेशा को यही रहना है कभी कही नहीं जाना | क्योंकि मै हाथ बड़ा कर अपना बचपन छू सकता हूँ , स्कूल का वो बच्चा बन सकता हूँ जो पहली बार कलम पकड़ता है, पहली बार साइकल चलता है , जी भर कर दौड़ता है ,तितलीया पकड़ता है, पहली बार अपनी दाढी मूछ बनता है , पहली बार किसी से प्यार करता है और ना जाने कैसी और कितनी अनगिनत बाते जो यहाँ उसकी रची बसी है जो उसे कभी कही नहीं जाने देती |

मै अपनी यादो क़ी तरह इस शहर को संजो के रखना चाहता हूँ , मगर जब मै टूटी सड़के देखता हूँ , जगह जगह गढढे, गन्दगी , कचरा , बेतरतीब दुकाने , गन्दा पानी , सडको पे फिरते आवारा जानवर और अव्यवस्था देखता हूँ लगता है मेरा सपना टूट रहा है | मेरा बस चले तो इस शहर में धूल और गंदगी का नमो निशाँ ना हो , एक भरा गिलास ले कर भी अगर हम चले तो क्या मजाल क़ी वो सड़क पे छलक जाए , चारो ओर हरियाली हो कुछ बनता हो , उन्नती करता हो , सवरता हो|,दुर्ग भिलाई रायपुर को मेट्रो से जोड़ दिया जाये , सूचना प्रोद्योगिकी से लेकर हर क्षेत्र क़ी उन्नती हो ,और इस क्षेत्र का हर इंसान और भी ज्यादा फक्र से बता सके क़ी वो यहाँ का है | मुझे पता है कुछ लोग मेरे ये विचार जानकर कहेंगे स्वप्न देखना आसान है मगर करना बहुत कठिन | मगर मेरा कहना यही है सोचने से ही सब होता है ,चाहने से ही रहे बनती है | मैंने किसी ट्रक के पीछे पढ़ा था
"सोच बदलो सितारे बदलेंगे
नजर बदलो नज़ारे बदलेंगे
कश्ती वही रहने दो
दिशा बदलो किनारे बदलेंगे "
कभी राजनीती के चलते कभी अव्यवस्था के चलते कभी कुप्रबंधन के चलते | वजह जो भी रही हो मगर इन सारी समस्याओ के पीछे हमारी कुछ बुरी आदते भी जिम्मेदार है | मै रोज अखबार में ना जाने ऐसे कितने जन समूह , संगठन और लोगो क़ी भीड़ देखता हूँ जो बिना किसी उद्देश्य के साथ मिलकर काम करते है , कभी रंगोली डालने , कभी मिठाई बनाने , कभी सस्ती लोकप्रियता पाने और ना जाने क्या क्या | मै ये नहीं कहता क़ी वो सब फालतू लोगो का संगठन है | मुझे लगता है क़ी इस सब से भी समय निकाल कर क्या कभी ये जनसमूह कोई शहरी जागरूकता वाला कार्यक्रम करते है ? अपने शहर को कैसे और अच्छा बनाना चाहिए , लोगो को किन बातो क़ी जानकारी होनी चाहिए , किस क्षेत्र में पुलिस क़ी गश्त होनी चाहिए, कहा सार्वजनिक शोचालय होना चाहिए , कहा ज्यादा सार्वजनिक वाहन चलने चाहिए | ऐसे अनेको विषय है जिन पे बात होनी चाहिए | क्योंकि जब बाते होंगी तो विचार बनगे और जब विचार एक जनसमूह में बनेगा तो वो परिवर्तन का कारण बनेगा , वरना जो जैसा है वो वैसा ही चलता रहेगा |
शायद हमारे पास कोई जरिया ना हो सुधारने का ,मगर हम आदते तो सुधार सकते है | क्या जरूरी है क़ी हम अपने जानवर खुली सड़क पे ही छोड़े. कचरा और गंदगी का निपटारा ना कर सके , अपने घर के सामने अगर सड़क पे गढ्ढा बन गया है तो हम उसे बर्दाश्त कर ले और उसके और बड़ा होने का इन्तजार करे और जब कोई उसमे गिर के मरे तब वो गढ्ढा भरेगा | चारो और उडती धुल ,धुआ और गन्दगी हम कैसे बर्दाश्त कर लेते है ? मै तो कहता हूँ सरकारे गिर जानी चाहिए अगर हमारे जनप्रतिनिधि हमें एक साफ़, सुंदर प्रगतिशील और सुरक्षित शहर ना दे सके तो | और हमारा प्रदेश और नगर तो वैसे ही बहुत सुंदर और प्रगतिशील है , मगर ये विडंबना है क़ी हम उसकी सुन्दरता को बढ़ाने के बजाय कम करते जाते है | इस खूबसूरत कालीन क़ी खूबसूरती हमने खूब देखी , मगर अब हमें ये ध्यान देना चाहिए क़ी इस पर टाट का कोई पैबंद ना लगने पाए | फक्र करने के दिन तो बहुत आयेंगे , मगर इस शहर को और इस प्रदेश को सवारने में उमर गुजर जाए | ताकी हमारी आने वाली पीढी भी इससे उतना ही प्रेम करे जितना हम करते है |

आपका
अनिल मिस्त्री